'Dhanteras' Monday 5 November 2018 Latest Update

‘Dhanteras’ Monday 5 November 2018 Latest Update

Dhanteras Festivle

‘Dhanteras’ Monday 5 November 2018 Latest Update :

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रियोदशी के दिन भगवन धन्वंतरि का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन को धनतेरस के रूप में मनाते है। धनतेरस का एक और नाम भी है जो है ‘धनत्रयोदशी’ ।  धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाते है । यह Festival हिन्दुओ में खास Festival माना जाता है। धनतेरस को ‘धन्य तेरस’ या ‘ध्यान तेरस’ भी कहा जाता हैं। इस दिन महावीर जी तीसरे और चौथे दिन योग निरोध के लिए चले गए थे । 3 दिन के बाद Diwali के दिन वह निर्वाण को प्राप्त हुए थे। तभी से इस दिन को धन्य तेरस के नाम से जाना जाता है।  इस दिन हर घर में नए बर्तन ख़रीदे जाते है क्यों की इस दिन भगवन धन्वंतरि चाकू और कलश लेकर प्रकट हुए थे जब धन्वंतरि प्रकट हुए थे तब उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था। तभी से  इस दिन हर घर में नए बर्तन खरीदने की परंपरा है। इस दिन लोग धनिये के बीज भी खरीदते है और उसे दिवाली के बाद अपने बगीचे व् खेत में बोते है ऐसा माना जाता है की इस दिन धन वास्तु खरीदने से उसमे वृद्धि होती है इसलिए लोग धनतेरस वाले दिन धनिये के बिच खरीदते हैं ।

Dhanteras Story :

धन्वन्तरि जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था। भगवान धन्वन्तरि चूंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है।

धनतेरस के दिन चांदी खरीदने की भी प्रथा है; जिसके सम्भव न हो पाने पर लोग चांदी के बने बर्तन खरीदते हैं। इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि यह चन्द्रमा का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है और मन में संतोष रूपी धन का वास होता है। संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है। जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है सुखी है और वही सबसे धनवान है। भगवान धन्वन्तरि जो चिकित्सा के देवता भी हैं उनसे स्वास्थ्य और सेहत की कामना के लिए संतोष रूपी धन से बड़ा कोई धन नहीं है। लोग इस दिन ही दीपावली की रात लक्ष्मी गणेश की पूजा हेतु मूर्ति भी खरीदते हें।

धनतेरस की शाम घर के बाहर मुख्य द्वार पर और आंगन में दीप जलाने की प्रथा भी है। इस प्रथा के पीछे एक लोक कथा है, कथा के अनुसार किसी समय में एक राजा थे जिनका नाम हेम था। दैव कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। |ज्योंतिषियों ने जब बालक की कुण्डली बनाई तो पता चला कि बालक का विवाह जिस दिन होगा उसके ठीक चार दिन के बाद वह मृत्यु को प्राप्त होगा। राजा इस बात को जानकर बहुत दुखी हुआ और राजकुमार को ऐसी जगह पर भेज दिया जहां किसी स्त्री की परछाई भी न पड़े। दैवयोग से एक दिन एक राजकुमारी उधर से गुजरी और दोनों एक दूसरे को देखकर मोहित हो गये और उन्होंने गन्धर्व विवाह कर लिया।

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विवाह के पश्चात विधि का विधान सामने आया और विवाह के चार दिन बाद यमदूत उस राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचे। जब यमदूत राजकुमार प्राण ले जा रहे थे उस वक्त नवविवाहिता उसकी पत्नी का विलाप सुनकर उनका हृदय भी द्रवित हो उठा परंतु विधि के अनुसार उन्हें अपना कार्य करना पड़ा। यमराज को जब यमदूत यह कह रहे थे उसी वक्त उनमें से एक ने यमदेवता से विनती की हे यमराज क्या कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे मनुष्य अकाल मृत्यु से मुक्त हो जाए। दूत के इस प्रकार अनुरोध करने से यमदेवता बोले हे दूत अकाल मृत्यु तो कर्म की गति है इससे मुक्ति का एक आसान तरीका मैं तुम्हें बताता हूं सो सुनो। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी रात जो प्राणी मेरे नाम से पूजन करके दीप माला दक्षिण दिशा की ओर भेट करता है उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। यही कारण है कि लोग इस दिन घर से बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाकर रखते हैं।

धनतेरस पर सभी महिलाओं को रजत लेख की अपनी पसंद खरीदने के लिए गहने या चांदी की दुकानों पर खरीदारी करना व्यस्त हो जाता है। लेकिन बहुत व्यस्त कार्यक्रमों और काम के कारण कई महिलाओं को अपने पसंदीदा आइटम की खरीदारी करने के लिए समय की स्वतंत्रता नहीं है। इसलिए उनके लिए ऑनलाइन खरीदारी की अग्रिम तकनीक का विकल्प उनकी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए धनतेरस के लिए शुद्ध रजत लेखों की पेशकश करते हैं। और कई बार 21 वीं शताब्दी की महिलाओं की मदद करने के लिए अपने समय की सुविधा और धनतेरस और दिवाली का आनंद लेने वाले कार्यक्षेत्रों का आनंद उठाया जा सकता है।

Source Credit Link - https://hi.wikipedia.org

Dhanteras Puja/Pooja Vidhi :

 

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'Dhanteras' Monday 5 November 2018 Latest Update
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कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रियोदशी के दिन भगवन धन्वंतरि का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन को धनतेरस के रूप में मनाते है। धनतेरस का एक और नाम भी है जो है 'धनत्रयोदशी' ।
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