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**गणेश चतुर्थी का त्योहार**

गणेश चतुर्थी हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह त्योहार भारत के विभिन्न भागों में मनाया जाता है किन्तु महाराष्ट्र व कर्नाटका में बडी़ धूमधाम से मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार इसी दिन गणेश का जन्म हुआ था। गणेश चतुर्थी पर हिन्दू भगवान गणेशजी की पूजा की जाती है।

गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों में या सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करते हैं और 10 दिनों तक उनकी पूजा करते हैं। ग्यारहवें दिन गणेश विसर्जन किया जाता है।

गणेश चतुर्थी के दौरान लोग भगवान गणेश को मोदक, लड्डू, नारियल आदि चढ़ाते हैं और उनकी आरती करते हैं। इस दिन लोग गणेश जी की स्तुति में भजन और गीत भी गाते हैं।

गणेश चतुर्थी का त्योहार ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि के देवता भगवान गणेश की पूजा और आराधना का त्योहार है। यह त्योहार लोगों को शांति, समृद्धि और खुशी प्रदान करता है।

**गणेश चतुर्थी का महत्व**

गणेश चतुर्थी का त्योहार हिंदुओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। गणेश जी को बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि का देवता माना जाता है। इसलिए लोग गणेश चतुर्थी के दिन उनसे अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना करते हैं।

गणेश चतुर्थी का त्योहार लोगों को एक साथ लाता है और उनमें भाईचारे की भावना पैदा करता है। इस दिन लोग अपने घरों और पंडालों को सजाते हैं और गणेश जी की पूजा करते हैं। लोग गणेश चतुर्थी के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी करते हैं।

**गणेश चतुर्थी की परंपराएं**

गणेश चतुर्थी के दिन लोग अपने घरों में या सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करते हैं। गणेश जी की मूर्ति को फूलों, मालाओं और अन्य सजावटी सामानों से सजाया जाता है। लोग गणेश जी की मूर्ति के सामने घी का दीया जलाते हैं और उनकी आरती करते हैं।

गणेश चतुर्थी के दौरान लोग गणेश जी को मोदक, लड्डू, नारियल आदि चढ़ाते हैं। मोदक गणेश जी का सबसे प्रिय भोग माना जाता है। लोग गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी की स्तुति में भजन और गीत भी गाते हैं।

गणेश चतुर्थी के दसवें दिन गणेश विसर्जन किया जाता है। गणेश विसर्जन का कार्यक्रम बड़ी धूमधाम से किया जाता है। लोग गणेश जी की मूर्ति को किसी नदी या तालाब में विसर्जित करते हैं।

**गणेश चतुर्थी का पर्यावरण पर प्रभाव**

गणेश चतुर्थी का त्योहार पर्यावरण पर कुछ नकारात्मक प्रभाव भी डालता है। गणेश जी की मूर्तियों को बनाने के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस और अन्य हानिकारक पदार्थों का उपयोग किया जाता है। जब इन मूर्तियों को नदियों और तालाबों में विसर्जित किया जाता है, तो ये पदार्थ पानी को प्रदूषित करते हैं।

हाल के वर्षों में, लोगों ने गणेश चतुर्थी का त्योहार पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाना शुरू किया है। लोग अब मिट्टी से बनी गणेश जी की मूर्तियाँ खरीदते हैं और उन्हें घरेलू बाल्टियों या अन्य बर्तनों में विसर्जित करते हैं। कुछ लोग गणेश जी की मूर्तियों को अपने बगीचों में भी विसर्जित करते हैं |

****ENGLISH*****

**Festival of Ganesh Chaturthi**

Ganesh Chaturthi is one of the major festivals of Hindus. This festival is celebrated in different parts of India but is celebrated with great pomp in Maharashtra and Karnataka. According to the Puranas, Ganesha was born on this day. Hindu Lord Ganesha is worshiped on Ganesh Chaturthi.

Ganesh Chaturthi is celebrated on the Chaturthi date of Shukla Paksha of Bhadrapada month. On this day people install the idol of Lord Ganesha in their homes or in public pandals and worship him for 10 days. Ganesh immersion is done on the eleventh day.

During Ganesh Chaturthi, people offer modak, laddu, coconut etc. to Lord Ganesha and perform his aarti. On this day people also sing hymns and songs in praise of Lord Ganesha.

The festival of Ganesh Chaturthi is a festival of worship and worship of Lord Ganesha, the god of knowledge, wisdom and prosperity. This festival provides peace, prosperity and happiness to the people.

**Importance of Ganesh Chaturthi**

The festival of Ganesh Chaturthi is very important for Hindus as Lord Ganesha is worshiped on this day. Ganesh ji is considered the god of intelligence, knowledge and prosperity. Therefore, on the day of Ganesh Chaturthi, people pray to him to fulfill their wishes.

The festival of Ganesh Chaturthi brings people together and creates a feeling of brotherhood among them. On this day people decorate their houses and pandals and worship Lord Ganesha. People also organize various cultural programs during Ganesh Chaturthi.

**Traditions of Ganesh Chaturthi**

On the day of Ganesh Chaturthi, people install the idol of Lord Ganesha in their homes or in public pandals. The idol of Lord Ganesha is decorated with flowers, garlands and other decorative items. People light ghee lamps in front of the idol of Lord Ganesha and perform his aarti.

During Ganesh Chaturthi, people offer modak, laddu, coconut etc. to Lord Ganesha. Modak is considered to be the most favorite offering of Lord Ganesha. People also sing hymns and songs in praise of Lord Ganesha on the day of Ganesh Chaturthi.

Ganesh immersion is done on the tenth day of Ganesh Chaturthi. The program of Ganesh Visarjan is done with great pomp. People immerse the idol of Lord Ganesha in a river or pond.

**Effect of Ganesh Chaturthi on environment**

The festival of Ganesh Chaturthi also has some negative effects on the environment. Plaster of Paris and other harmful substances are used to make the idols of Lord Ganesha. When these idols are immersed in rivers and ponds, these substances pollute the water.

In recent years, people have started celebrating the festival of Ganesh Chaturthi in an eco-friendly way. People now buy idols of Lord Ganesha made of clay and immerse them in household buckets or other utensils. Some people also immerse the idols of Lord Ganesha in their gardens.

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