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पत्नी ने जबरन करवाया धर्मांतरण: मुस्लिम रीति-रिवाजों से शादी, फिर दी रेप केस की धमकी – जानिए कर्नाटक का पूरा मामला

On: July 17, 2025 12:50 PM
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मैं आरोही चौधरी हूं और आज मैं आपके सामने एक गंभीर सामाजिक व कानूनी मुद्दे से जुड़ी घटना का संपूर्ण विवरण लेकर आई हूं। यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डालने वाली नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक ढांचे, धार्मिक स्वतंत्रता और वैवाहिक अधिकारों से जुड़े कई सवाल खड़े करती है।

यह मामला कर्नाटक के गडग जिले से जुड़ा है, जहां विशाल कुमार गोकावी नामक एक युवक ने अपनी पत्नी तहसीन होसोमानी पर जबरन धर्म परिवर्तन और बलात्कार के झूठे केस में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया है।

मामला संक्षेप में

मामले का पहलूविवरण
आरोपी महिला का नामतहसीन होसोमानी
शिकायतकर्ता पुरुषविशाल कुमार गोकावी
स्थानगडग जिला, कर्नाटक
विवाह की प्रकृतिकोर्ट मैरिज → मुस्लिम रीति से शादी
आरोपजबरन धर्म परिवर्तन, धमकी, दबाव
दर्ज धाराएंBNS धारा 299 और 302
विशेष धमकीरेप केस में फंसाने की धमकी

कैसे हुआ दोनों का रिश्ता शुरू?

विशाल और तहसीन तीन सालों तक रिलेशनशिप में थे। इस दौरान दोनों के बीच अच्छा संबंध बना रहा। नवंबर 2024 में दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली, जिससे दोनों परिवारों को यह लगा कि दोनों ने सहमति से विवाह किया है।

परंतु विवाह के बाद जो हुआ, वह न केवल विशाल बल्कि पूरे समाज के लिए चौंकाने वाला था।

मुस्लिम रीति-रिवाजों से शादी का दबाव

विशाल के अनुसार कोर्ट मैरिज के कुछ समय बाद ही तहसीन ने उस पर मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार दोबारा शादी करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।

“मैंने रिश्ते की शांति बनाए रखने के लिए हामी भर दी। अप्रैल 2025 में हमने मुस्लिम रीति से शादी की।”

लेकिन इस शादी में विशाल को एक गहरी चोट लगी। उसकी जानकारी के बिना ही उसका नाम बदल दिया गया और एक मौलवी के जरिए इस्लाम कबूल करवाया गया।

वायरल वीडियो और पहचान का संकट

इस शादी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें विशाल और तहसीन मुस्लिम रीति से शादी करते दिख रहे हैं।

यह वीडियो इस मामले में एक महत्वपूर्ण साक्ष्य बन चुका है और इससे यह साबित होता है कि धर्मांतरण के दौरान विशाल की स्वेच्छा का अभाव था।

हिन्दू रीति-रिवाजों से शादी से इनकार

विशाल के परिवार ने 5 जून को हिन्दू रीति-रिवाजों से विवाह की तैयारी की। शुरू में तहसीन इसके लिए तैयार थी, लेकिन बाद में उसने अपने परिवार के दबाव में आकर मना कर दिया।

यहां से विशाल को महसूस हुआ कि उस पर केवल एकपक्षीय धार्मिक दबाव डाला जा रहा है, जिसकी कोई कानूनी और नैतिक अनुमति नहीं है।

इस्लाम कबूल नहीं करने पर धमकी

सबसे चौंकाने वाला आरोप विशाल ने यह लगाया कि तहसीन और उसकी मां बेगम बानू ने उस पर नमाज पढ़ने और जमात में शामिल होने के लिए दबाव बनाया।

“उन्होंने मुझे कहा कि अगर मैंने इस्लाम कबूल नहीं किया तो वे मुझ पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाकर केस दर्ज करा देंगी।”

पुलिस द्वारा दर्ज धाराएं: IPC की जगह अब BNS

भारत में अभी हाल ही में Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) लागू हुई है, जो पुराने IPC की जगह ले रही है। इस मामले में भी BNS की नई धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है:

BNS धाराअर्थ
धारा 299धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा
धारा 302धार्मिक पहचान से जुड़ी सुरक्षा का उल्लंघन

धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन

भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है और यहां हर नागरिक को अपनी धार्मिक पहचान बनाए रखने का संवैधानिक अधिकार है। अनुच्छेद 25 से 28 तक धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार दिए गए हैं।

इस मामले में अगर विशाल के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह भारतीय संविधान के मूल्यों के सीधे उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

कानून विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • यदि धर्म परिवर्तन बिना लिखित सहमति और प्रक्रिया के हुआ हो, तो यह अवैध माना जाएगा।
  • बलात्कार का झूठा केस दर्ज कराना धारा 211 (BNS के तहत) के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।

सोशल मीडिया और जनमानस की प्रतिक्रिया

जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर #JusticeForVishal ट्रेंड करने लगा। कई लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा की और धर्मांतरण जैसे संवेदनशील विषय पर कठोर कानूनों की मांग की।

राजनैतिक प्रतिक्रिया

कुछ राजनैतिक दलों ने इसे “लव जिहाद” से जोड़कर देखा, तो कुछ ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया।

हालांकि प्रशासन ने अभी तक इस मामले को संवेदनशील मानते हुए, जांच को निष्पक्ष रखने का आश्वासन दिया है।

भारत में जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े आंकड़े

वर्षमामले दर्ज (अनुमानित)अधिकतम राज्य
202174उत्तर प्रदेश
2022102मध्य प्रदेश
202388कर्नाटक
2024127 (अब तक)कर्नाटक

क्या कहती हैं महिलाएं?

कुछ महिला संगठनों ने यह कहा कि यह मामला महिलाओं की छवि को गलत रूप में प्रस्तुत करता है। लेकिन वहीं कुछ अन्य संस्थाओं ने तहसीन की निंदा की और इसे धोखाधड़ी तथा दबाव की श्रेणी में गिना।

भविष्य में क्या कदम उठाने की जरूरत है?

  • धर्मांतरण के लिए स्पष्ट सहमति कानून हो।
  • विवाह के पूर्व धर्म संबंधी जानकारी सार्वजनिक रूप से दर्ज हो।
  • कोर्ट मैरिज के लिए दंपती की धार्मिक पहचान सुनिश्चित की जाए।
  • ऐसे मामलों की तेज जांच के लिए विशेष प्रकोष्ठ गठित हो।

निष्कर्ष:

इस मामले ने समाज, धर्म और कानून के बीच संतुलन की आवश्यकता को उजागर किया है। विशाल कुमार गोकावी का आरोप गंभीर है और अगर सच्चा साबित होता है तो यह भारत के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के लिए एक चेतावनी है।

मैं आरोही चौधरी होने के नाते आपसे निवेदन करती हूं कि इस विषय पर संवेदनशील रहें और धर्म या लिंग के आधार पर पूर्वाग्रह न पालें। न्याय की प्रतीक्षा करें और कानून पर विश्वास बनाए रखें।

Aarohi Chaudhary

नमस्ते, मैं Aarohi Chaudhary हूं। पिछले 3 वर्षों से लेखन की दुनिया में अपनी पहचान बना रही हूं। मैंने कई वेबसाइट्स के लिए ऐसी सामग्री तैयार की है जो न केवल जानकारीपूर्ण हो, बल्कि पाठकों से गहराई से जुड़ सके। लेखन मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम है। मेरा लक्ष्य है—हर शब्द से कहानी कहना और हर वाक्य से प्रभाव छोड़ना।

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